डीआरडीओ के कौन से वैज्ञानिक हैं, जिन्हें एटीएस ने पाकिस्‍तान को गोपनीय सूचनाएं देने के लिए पकड़ा?

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फोटो: न्यूज़18/डीआरडीओ के कौन से वैज्ञानिक हैं, जिन्हें एटीएस ने पाकिस्‍तान को गोपनीय सूचनाएं देने के लिए पकड़ा?
फोटो: न्यूज़18/डीआरडीओ के कौन से वैज्ञानिक हैं, जिन्हें एटीएस ने पाकिस्‍तान को गोपनीय सूचनाएं देने के लिए पकड़ा?

ATS Probing Espionage Case: महाराष्ट्र एंटी टेररिज्म स्‍क्‍वायड (एटीएस) ने 9 मई 2023 को पुणे की एक अदालत को बताया कि कुछ महिलाओं और डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गेनाइजेशन के वरिष्ठ वैज्ञानिक प्रदीप कुरुलकर के बीच डीआरडीओ के एक गेस्टहाउस में हुई मुलाकातों की जांच की जा रही है. मामले में 59 वर्षीय कुरुलकर को पुणे से 3 मई को गिरफ्तार किया गया है. कुरुलकर पर आरोप है कि वह पाकिस्‍तान के लिए जासूसी कर रहे थे. साथ ही पाकिस्‍तान ऑपरेटिव्‍स से संपर्क में थे. एटीएस ने कोर्ट को बताया कि डीआरडीओ गेस्‍ट हाउस के रिकॉर्ड अभी तक उपलब्‍ध नहीं हुए हैं. रिकॉर्ड मिलने पर अभियुक्तों की मौजूदगी में जांच करने की जरूरत होगी.

न्यूज़18 की खबर के अनुसार, अदालत ने वरिष्‍ठ वैज्ञानिक कुरुलकर की हिरासत सात दिन के लिए बढ़ाकर 15 मई तक कर दी. एटीएस ने कोर्ट में कहा कि एक मोबाइल हैंडसेट भी बरामद किया गया. इसकी जांच में पता चला कि एक भारतीय नंबर से पाकिस्तानी खुफिया ऑपरेटिव ने कुरुलकर को एक संदेश दिया था. इसमें उसने कुरुलकर से पूछ है कि आपने मुझे ब्लॉक क्यों किया? एटीएस ने कोर्ट को बताया कि आरोपियों से जब्त इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की मंगलवार को मिली फॉरेंसिक रिपोर्ट की जांच की जरूरत है. मामले में जांच अधिकारी इंस्पेक्टर सुजाता तनावाडे ने कोर्ट को बताया कि एटीएस को गूगल से एक रिपोर्ट मिली थी. इसके मुताबिक, जांच शामिल एक जीमेल एड्रेस पाकिस्तानी यूजर का है.

कौन हैं वरिष्‍ठ वैज्ञानिक कुरुलकर?
डीआरडीओ के वरिष्‍ठ वैज्ञानिक प्रदीप कुरुलकर का जन्‍म 1963 में हुआ. उन्‍होंने साल 1985 में सीओईपी पुणे से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में बैचलर ऑफ इंजीनियरिंग की डिग्री ली. इसके बाद 1988 में डीआरडीओ में काम करना शुरू कर दिया. इस दौरान उन्‍होंने ड्राइव और एप्लिकेशन पर काम करने के साथ ही आईआईटी कानपुर से एडवांस्‍ड पावर इलेक्‍ट्रॉनिक्‍स कोर्स वर्क भी पूरा किया. कुरुलकर को रक्षा क्षेत्र का सबसे काबिल वैज्ञानिक माना जाता है. बता दें कि वैज्ञानिक प्रदीप कुरुलकर इसी साल नवंबर में रिटायर होने वाले थे, लेकिन अब तय प्रक्रिया के तहत उन्‍हें निलंबित कर दिया गया है.

किन प्रोजेक्‍ट्स में रही अहम भूमिका?
कुरुलकर की काबिलियत को देखते हुए उन्‍हें रक्षा अनुसंधान व विकास संगठन के सिस्टम इंजीनियरिंग लैब का डायरेक्‍टर नियुक्त किया गया था. प्रदीप कुरुलकर मिसाइल लांचर मिलिट्री इंजीनियरिंग गियर, एडवांस रोबोटिक्स और सैन्य प्रयोगों के लिए मानवरहित प्रणालियों का डिजाइन व डेवलपमेंट के एक्‍सपर्ट हैं. उन्‍होंने हाइपरबेरिक चैंबर, मोबाइल इलेक्ट्रिसिटी सप्‍लाई और हाई प्रेशर एयर सिस्‍टम जैसी कई सैन्‍य इंजीनियरिंग प्रणालियों व उपकरणों के डिजाइन, डेवलपमेंट और डिस्‍ट्रीब्‍यूशन में अहम भूमिका निभाई थी. उन्‍होंने डीआरडीओ की रणनीतिक तौर पर अहम परियोजनाओं पर काम किया है. इनमें कई मिसाइल प्रणालियों के अलावा परमाणु सक्षम अग्नि मिसाइल सीरीज भी शामिल है.

प्रदीप कुरुलकर पर क्‍या हैं आरोप?
डीआरडीओं के वरिष्‍ठ वैज्ञानिक प्रदीप कुरुलकर पर महाराष्‍ट्र एटीएन ने कई गंभीर आरोप लगाए हैं. एटीएस का आरोप है कि कुरुलकर पद का दुरुपयोग करते हुए देशद्रोही गतिविधियों में शामिल हुए हैं. उन्‍होंने वॉट्सऐप मैसेजेस और वॉयस व वीडियो कॉल के जरिये पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी से संपर्क किया था. एटीएस ने कहा है कि कुरुलकर ने जिम्मेदार पद पर होने के बाद भी संवेदनशील सरकारी दस्तावेजों को दुश्‍मन देश पाकिस्तान के साथ साझा करने की कोशिश की, जो राष्ट्रद्रोह है. डीआरडीओ का सीक्रेट प्रोग्राम दुश्मन देश के हाथों में पड़ने से भारत की सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है. एटीएस के मुताबिक, कुरुलकर ने हनी ट्रैप में फेसकर पाकिस्‍तान के लिए जासूसी की है.

कैसे हुई कुरुलकर की गिरफ्तारी?
एटीएस ने बताया कि डीआरडीओ को सबसे पहले आरोपी के कथित तौर पर पाकिस्तान से संपर्क करने की सूचना मिली. इसके बाद प्रक्रिया के अनुसार, फॉरेंसिक जांच के लिए 24 फरवरी 2023 को डीआरडीओ के अधिकारियों के सेल फोन, लैपटॉप, हार्ड डिस्क समेत डेस्कटॉप और कई इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को जब्त किया गया. इसके बाद डीआरडीओ की आंतरिक स्थायी समिति की जांच और एक फोरेंसिक रिपोर्ट से पता चला कि आरोपी कथित तौर पर वॉट्सऐप मैसेजेज, वॉइस व वीडियो कॉल के जरिये एक महिला पाकिस्तानी ऑपरेटिव से लगातार संपर्क में था और उसके साथ संवेदनशील जानकारी शेयर कर रहा था. इसके बाद एटीएस ने उन्‍हें गिरफ्तार कर लिया. उन पर जासूसी और गलत तरीके से संचार करने से जुड़े आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम के प्रावधानों के तहत मामला दर्ज किया गया.

मिले अलग-अलग पासपोर्ट: एटीएस
एडीएस ने 9 मई को रिमांड सुनवाई के दौरान कोर्ट को बताया कि आरोपी के पास अलग-अलग निजी व सरकारी पासपोर्ट थे. जांच में पता चला है कि कुरुलकर ने सरकारी पासपोर्ट पर दूसरे देशों की यात्रा की है. ऐसे में उसकी यात्राओं से जुड़े हर पहलू की जांच भी करने की जरूरत पड़ेगी. वहीं, कुरुलकर का कहना है कि उन्‍होंने 2019 के बाद अपने निजी पासपोर्ट पर विदेश की कोई यात्रा नहीं की है. एटीएस के मुताबिक, ये भी पता लगाया जा रहा है कि उसके साथ पाकिस्‍तान को गोपनीय जानकारी भेजने में कौन-कौन शामिल था. एटीएस ने कोर्ट से ये भी कहा कि आरोपी से उसके बैंक स्‍टेटमेंट के बारे में भी पूछताछ की जरूरत है.

हनी ट्रैप में कैसे फंस गए कुरुलकर?
एटीएस को कुरुलकर और पाकिस्तानी जासूस के काफी वॉट्सऐप मैसेजेज मिले हैं. एक मैसेज में उन्‍हेांने पाकिस्तानी जासूस को बताया कि वह रूस से लंदन आने वाले हैं. हालांकि, एटीएस की छानबीन में पता चला कि वह रूस और लंदन दोनों जगह ही नहीं गए थे. जांच में पता चला कि हनी ट्रैप में कुरुलकर को फांसने वाली महिला ने पहला वॉट्सऐप मैसेज जरा दास गुप्ता के नाम से किया था. उसने लिखा कि ‘लंदन की यह खूबसूरत भारतीय लड़की आपकी बहुत बड़ी फैन है. कुरुलकर तारीफ से खुश हुए और उससे जुड़ गए. कुरुलकर ने जांच के दौरान बताया कि उन्‍हें उस लड़की के पाकिस्‍तानी होने का अंदाजा तक नहीं था. महिला ने कुरुलकर से कहा कि आपने देश के लिए बहुत अच्छा काम किया है. उसने पाकिस्तान को जमकर गालियां दीं. बस यहीं कुरुलकर गच्‍चा खा गए और उसके जाल में फंस गए. बाद में जब उन्‍हें गलती का अहसास हुआ तो उन्‍होंने उसे ब्‍लॉक कर दिया.

बचाव पक्ष ने कोर्ट में क्‍या दी दलील?
बचाव पक्ष के वकील ऋषिकेश गानू मंगलवार को कोर्ट में तर्क दिया, ‘एटीएस की ओर से पेश किए गए ब्‍योरे से साफ है कि कुरुलकर ने कथित पाकिस्तानी ऑपरेटिव को ‘ब्लॉक’ कर दिया था. इस मामले की जांच 24 फरवरी 2023 से जारी है. एटीएस ने 18 अप्रैल को आरोपी से सभी उपकरण भी जब्त कर लिए हैं. इसके अलावा कुरुलकर समन मिलने के बाद 19 से 24 अप्रैल के बीच एटीएस के सामने पेश हुए. वह जांच में पूरा सहयोग कर रहे हैं.’ उन्‍होंने कहा कि जब्त उपकरणों, फोरेंसिक रिपोर्ट, डीआरडीओ रिकॉर्ड और बैंक स्टेटमेंट पर उनका कोई नियंत्रण नहीं है. सरकारी पासपोर्ट पर विदेश जाने के कारण उनकी विदेश यात्राओं का ब्‍योरा सरकार के पास उपलब्ध है. लिहाजा, उनकी हिरासत की अवधि बढ़ाने की कोई जरूरत नहीं थी.

कोर्ट ने क्‍यों बढ़ाई हिरासत अवधि?
कुरुलकर की रिमांड बढ़ाते हुए अदालत ने पाया कि जांच के दौरान नए साक्ष्‍य सामने आए हैं. आरोपी के मोबाइल फोन से हटाए गए डाटा की जांच करना जरूरी है. इसलिए डीआरडीओ के वरिष्‍ठ वैज्ञानिक की हिरासत 15 मई तक के लिए बढ़ा दी. कोर्ट में चल रहे मामले के इतर सड़क पर वरिष्‍ठ वैज्ञानिक प्रदीप कुरुलकर के खिलाफ विरोध प्रदर्शन भी चल रहे हैं. इसी कड़ी में राकांपा की पुणे इकाई ने कुरुलकर के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया. प्रदर्शनकारियों ने वैज्ञानिक कुरुलकर पर पाकिस्तान का एजेंट होने का आरोप लगाते हुए मौत की सजा की मांग की है.