शब-ए-बारात और होली पर कायम रखें सांप्रदायिक सौहार्द्र: कारी वसी अशरफ

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संभल/नई दिल्ली: इस बार होलिका दहन और शब-ए-बारात त्योहार एक ही दिन मनाए जाएंगे. ऐसे में देश भर में एहतियात बरती जा रही है. इस पर संभल के मुस्लिम धर्मगुरु कारी वसी अशरफ ने मुस्लिम युवाओं को ताकीद की है कि वे शांति से शब-ए-बारात मनाएं और होलिका दहन स्थलों की ओर न जाएं.

सात मार्च की रात को हिंदू भाई होलिका दहन करेंगे और उसी रात को मुस्लिम भाई शब-ए-बारात का त्योहार मनाएंगे. होलिका दहन के बड़े पैमाने पर हिंदू भाई जुटते हैं, तो दूसरी ओर मुस्लिम भाई भी अपने बुजुर्गों की याद में कब्रिस्तान पर जाकर दीपदान करते हैं. ऐसे में शरारती तत्व माहौल खराब कर सकते हैं. जबकि सांप्रदायिक सौहार्द हर हाल में बनाए रखने की जरूरत है.

आवाज द वॉयस की खर के अनुसार, दुर्घटना से सावधानी भली, कदाचित इसी थीम पर कारी वसी अशरफ ने कहा है कि हिंदुस्तान में हिंदू और मुसलमानों के पुरखे सदियों से एक साथ रहते आए हैं. इसलिए त्योहारों के इस मौके पर कोई ऐसी बेजा हरकत न करें, जिससे आपसी भाईचारे में खलल पड़े.

मुस्लिम धर्मगुरु कारी वसी अशरफ ने साफतौर पर कहा कि होली एवं शब-ए-बारात का त्योहार एक ही दिन मनाया जाएगा. इसलिए मुसलमान होलिका दहन स्थलों की ओर न जाएं और वहां जाने से पूरी तरह से परहेज करें.

शब-ए-बारात मनाने के लिए मुसलमानों को भी कब्रिस्तान जाना है. इसलिए मुस्लिम लोग असर और मगरिब के बाद कब्रिस्तान जाएं, इशा के बाद न जाएं. उन्होंने कहा कि यदि कोई मुसलमान इशा के बाद कब्रिस्तान जाए भी, तो हिंदू भाई जिम्मेदारी से उनका ख्याल रखें और उन पर रंग एवं गुलाल न डालें.