और धैर्य की तो परिभाषा ही महिला से है: एक्ट्रेस श्रुति दत्त

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नई दिल्ली: इस महिला दिवस पर मैं सबसे पहले उन सभी महिलाओं का धन्यवाद करना चाहूंगी जिन्होंने हर संघर्ष का सामना करते हुए शिखर तक का रास्ता तय किया और एक मजबूत किरदार को दर्शाते हुए समाज के लिए प्रेरणास्रोत्र बनीं. साथ ही उन महिलाओं की भी सराहना है जो हर दिन अपने व्यक्तित्व को मज़बूत करने के लिए लड़ती हैं- कभी समाज की बन्दिशों से तो कभी खुद अपने ही भीतर चल रहे सही गलत के संघर्ष से. उन पुरुषों को भी मेरा प्रशंसा पत्र जो महिलाओं को उनकी योग्यता और लगन के आधार पर उन्हे आगे बढ़ने में सहयोग देते हैं.

एक महिला का किरदार निभाना आसान नहीं है और यह किरदार कितना सम्पूर्ण और श्रेष्ठता भरा सम्मान है, ये हम कभी कभी भूल जाते हैं, जब हमारा मुख्य केंद्र महिला होने की चुनौतियों पर अधिक होता है.

हालाँकि ये सच है कि समाज की कई बंदिशें होती हैं महिलाओं पर और बेहद अफ़सोस होता है देखकर, जब उनकी क्षमताएं व्यर्थ जाती दिखाई पड़ती हैं. लेकिन जब एक महिला सभी चुनौतियों का सामना करके, सारी बंदिशें तोड़कर, हर रूढ़िवादी विचरधारा को लांघकर कुछ मुकाम हासिल कर लेती है और दुनिया में अपनी जगह बनाती है. मुझे नहीं लगता उससे बड़े गौरव की बात कोई होती है.

किसी इंसान के किरदार की पहचान बुरे समय में उसके धैर्य से होती है, जिसे ढाल बनाकर वह सब चुनौतियों का सामना करता है और धैर्य की तो परिभाषा ही महिला से है.

मुझे गर्व है अपने महिला होने पर और सभी को यह संदेश है कि यदि आप एक जागरूक नागरिक हैं और अपने आस पास किसी महिला को परिस्थितियों से जूझता हुआ देखें तो हमदर्दी दिखाने के बजाय उन्हें प्रोत्साहन दें. उनका हौसला बढ़ाएं, उनकी हिम्मत बनें. महिलाओं से भी यह अनुरोध है कि महिलाओं के जीवन को खुद भलीभांति समझते हुए
दूसरी महिलाओं की सराहना करें, उनकी ताकत बनें.